यह पहली बार हुआ होगा की लड़ाई दो देश लड़ रहे है और लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी सफाई दे रही है की जहाज गिरे या न गिरे। उनको क्या पड़ी है ?

लेखक: देबाशीष रॉय
कुछ न कुछ गड़बड़ तो ज़रूर है। हाल ही में, डसॉल्ट एविएशन के चेयरमैन और प्रधान अधिकारी CEO एरिक ट्रैपियर ने फ़्रांसिसी वेबसाइट ‘Avion De Chasse’ में यह कहा कि ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान एक भी राफेल विमान को युद्ध में मार गिराया नहीं गया, लेकिन भारत ने एक जेट ‘ऊँचाई पर तकनीकी खराबी’ के कारण खो दिया।
DronePages अपने पाठकों के सामने यह सवाल रखता है—क्या कभी किसी फाइटर जेट निर्माता कंपनी के प्रधान अधिकारी CEO ने दो देशों के युद्ध में अपने विमान के नुकसान के बारे में इस तरह सफाई दी है? जब मध्य पूर्व में अमेरिका और किसी अरब देश या दो अरब देशों के बीच युद्ध होता है, तो क्या बोइंग, लॉकहीड मार्टिन और नॉर्थ्रॉप ग्रुमन जैसे अमेरिकी रक्षा कंपनियाँ ईरान, इराक, सीरिया, ओमान, क़तर, चेक गणराज्य, मिस्र या इज़राइल के दावों पर प्रेस बयान जारी करती हैं? क्या यूरोपीय फाइटर जेट निर्माता जैसे एयरबस, बीएई सिस्टम्स, डसॉल्ट एविएशन और साब युद्धों के बाद प्रेस रिलीज़ निकालते हैं? फिर डसॉल्ट एविएशन को भारत और पाकिस्तान के दावों का खंडन करने की क्या मजबूरी है?
आगे देखें तो भारत के सैन्य और सरकारी अधिकारी भी कुछ स्पष्ट कहने से बच रहे हैं। न तो कोई स्पष्ट बयान आ रहा है कि कोई विमान नहीं खोया और न ही यह कहा जा रहा है कि कोई विमान युद्ध में नहीं खोया गया, हाँ तकनीकी कारणों से विमान के नुकसान को स्वीकारा गया है। लेकिन किस विमान का नुकसान हुआ? इस पर भी चुप्पी। भारतीय वायुसेना ने कितने पाकिस्तानी F-16 और JF-17 मार गिराए? इस पर भी कोई स्पष्टता नहीं।
किसी को भी, जो इस युद्ध में महत्वपूर्ण है, सही या गलत कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं हो रही है। संवाद का एक धुँधला सा जाल फैला हुआ है।
पाकिस्तान का दावा है कि उसने भारतीय वायुसेना के पाँच विमानों को गिरा दिया, लेकिन उनके रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ ने कहा कि इस दावे का सबूत सोशल मीडिया में है (जमीन पर मलबा नहीं), जिससे यह आतंक प्रायोजक देश फिर एक बार हंसी का पात्र बन गया। यह बयान 8 मई 2025 को दिया गया था।
उसके बाद हम भारतीय निश्चिंत हो गए। लेकिन फिर हमारे ही कुछ अधिकारी माहौल को उलझा गए।
11 मई 2025 को एक लाइव प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारतीय वायुसेना के एयर ऑपरेशन्स के महानिदेशक, एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने इस विषय पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा: “नुकसान युद्ध का हिस्सा है। मैं विवरण उजागर नहीं करना चाहता। लेकिन मैं कह सकता हूँ कि हमारे सभी पायलट सुरक्षित घर लौट आए हैं।” इसने हर भारतीय के दिल को चुभो दिया क्योंकि उन्होंने यह नहीं कहा कि “हमने युद्ध में एक भी विमान नहीं खोया।” इसका साफ मतलब है कि हमने युद्ध में विमान खोया। यह डसॉल्ट एविएशन के प्रधान अधिकारी CEO के बयान के ठीक उलट है।
फिर 31 मई 2025 को भारतीय थलसेना के चार-स्टार जनरल और भारतीय सशस्त्र बलों के वर्तमान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), जनरल अनिल चौहान ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा: “महत्वपूर्ण यह नहीं है कि विमान गिराए गए या नहीं, बल्कि यह कि वे क्यों गिराए गए। छह फाइटर जेट्स खोने का दावा बिल्कुल गलत है। असल में महत्वपूर्ण यह है कि वे क्यों गिरे और उसके बाद हमने क्या किया। यही हमारे लिए महत्वपूर्ण है।”
यह फिर से साफ करता है कि हमने युद्ध में राफेल फाइटर जेट्स खोए। सवाल है: इसे साफ-साफ स्वीकार क्यों नहीं किया जा रहा या साफ-साफ नकारा क्यों नहीं जा रहा? यह दिमागी खेल किस उद्देश्य के लिए खेले जा रहे हैं?
इसी तरह, 10 जून 2025 को जकार्ता में एक विश्वविद्यालय संगोष्ठी के दौरान इंडोनेशिया में भारत के रक्षा अताशे, कैप्टन शिव कुमार ने कहा: “मैं यह नहीं मानता कि हमने इतने अधिक विमान खोए, लेकिन मैं मानता हूँ कि हमने कुछ विमान खोए हैं… भारतीय वायुसेना ने 7 मई 2025 की रात पाकिस्तान से लड़ते हुए फाइटर जेट्स खोए, केवल इसलिए क्योंकि राजनीतिक नेतृत्व ने सैन्य प्रतिष्ठानों या उनकी एयर डिफेंस पर हमला न करने की सीमा तय कर दी थी।”
यह फिर संकेत करता है कि शायद भारत का राजनीतिक नेतृत्व ही इन दिमागी खेलों या सैन्य कार्रवाई की सीमाओं का संभावित, कथित स्रोत है। क्या ऐसा नहीं है?
इसी तरह की बातें रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 8 जुलाई 2025 को CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कही: “आपने ‘राफेल्स’ शब्द का बहुवचन में इस्तेमाल किया है, मैं आश्वस्त कर सकता हूँ कि यह पूरी तरह गलत है। पाकिस्तान को भारत की तुलना में मानव और सामग्री दोनों मामलों में कई गुना अधिक नुकसान हुआ और 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।” लेकिन इस बयान में भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि क्या हमने कोई राफेल युद्ध में या तकनीकी कारणों से खोया या नहीं।
लेफ्टिनेंट जनरल सुमेर इवान डी’कुन्हा का क्या? एक स्पष्ट और सीधा सवाल एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) द्वारा पूछे जाने पर भी उन्होंने हाँ या ना में कोई जवाब नहीं दिया।
तो हमें इससे क्या समझना चाहिए? हम केवल अटकलबाज़ी कर सकते हैं। इसका अंतिम उद्देश्य क्या हो सकता है? क्या यह डसॉल्ट एविएशन को राफेल के सोर्स कोड को जारी करने के लिए मजबूर करने की कोई रणनीति है, ताकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और उसके निजी क्षेत्र के साझेदार इसे तेजस और भारतीय राफेल्स पर मिसाइल लगाने के लिए इस्तेमाल कर सकें? जब तक कहीं से कोई स्पष्ट बयान नहीं आता, हम केवल अनुमान ही लगा सकते हैं। राफेल ने इसके बाद अपने ऑर्डर बुक की स्थिति के बारे में एक प्रेस रिलीज़ निकाली है। लेकिन अगर दिमागी खेल खेले जा रहे हैं, तो वे शायद असर नहीं कर रहे।
और क्या आपको श्री मनोहर पर्रीकर की लंबी चली सौदेबाज़ियों की याद है? क्या उन्होंने राफेल के सोर्स कोड की डिलीवरी को अनुबंध का हिस्सा बनाने की मांग की थी? साफ है, उन्होंने नहीं की। तो अचानक युद्ध के दौरान और जब हम अपना एएमसीए AMCA हवाई जहाज बना रहे हैं, हमें सोर्स कोड की ज़रूरत क्यों आन पड़ी?
अंतिम बिंदु: युद्धविराम इतनी जल्दी और बिना किसी स्पष्ट कारण के क्यों घोषित कर दिया गया? पाकिस्तान ने युद्धविराम मांगा, यह कोई वैध कारण नहीं है। हमें अपने दुश्मन को समाप्त कर देना चाहिए था, न कि उन्हें जीवित छोड़ देना चाहिए था।